Chapter 13
अजुन उवाच |
कृ ितं पुषं चैव ें ेमेव च |
एतेिदतुिमािम ानं ेयं च के शव || 1||* 1
ीभगवानुवाच |
इदं शरीरं कौेय ेिमिभधीयते |
एतो वेि तं ा: े इित तिद: || 2||
ें चािप मां िव सवेेषु भारत |
ेेयोानं यानं मतं मम || 3||
तें य या(yadrik cha (nature) यिकार यत यत् |
स च यो यभाव तमासेन मे णु || 4||
ऋिषिभबधा गीतं छोिभिविवधै: पृथक् |
सूपदैैव हेतुमिविनितै: || 5 ||
महाभूताकारो बुर मेव च |
इयािण दशैकं च प चेयगोचरा: || 6||
(.6: The field of activities is composed of the five great elements, the ego, the
intellect, the unmanifest primordial matter, the eleven senses (five knowledge
senses, five working senses, and mind), and the five objects of the senses.)
इा ेष: सुखं द
ु
:खं सातेतना धृित: |
एतें समासेन सिवकारमुदातम् || 7||
अमािनमदमिहंसा ाराजवम् |
आचायपासनं शौचं थैयमािविनह: || 8||
इयाथषु वैरामनहार एव च |
जमृुजराािधद
ु
:खदोषानुदशनम् || 9||
असरनिभ: पुदारगृहािदषु |
िनं च समिचिमािनोपपिषु || 10||
मिय चानयोगेन भरिभचारणी |
िविवदेशसेिवमरितजनसंसिद || 11||
अाानिनं तानाथदशनम् |
एतानिमित ोमानं यदतोऽथा || 12||
ेयं यवािम याामृतमुते |
अनािदमरं  न सासद
ु
ते || 13||
सवत: पािणपादं तवतोऽििशरोमुखम् |
सवत: ुितमोके सवमावृ ितित || 14||
सवयगुणाभासं सवयिवविजतम् |
असं सवभृैव िनगुणं गुणभोृ च || 15||
बिहर भूतानामचरं चरमेव च |
सूादिवेयं द
ू
रथं चाके च तत् || 16||
अिवभं च भूतेषु िवभिमव च थतम् |
भूतभतृ च तेयं िसु भिवु च || 17||
ोितषामिप तोितमस: परमुते |
ानं ेयं ानगं िद सव िवितम् || 18||
इित ें तथा ानं ेयं चों समासत: |
म एतिाय मावायोपपते || 19||
कृ ितं पुषं चैव िवनादी उभाविप |
िवकारां गुणांैव िव कृ ितसवान् || 20||
कायकारणकतृे हेतु: कृ ितते |
पुष: सुखद
ु
:खानां भोृे हेतुते || 21||
पुष: कृ ितथो िह भुङे कृ ितजागुणान् |
कारणं गुणसोऽ सदसोिनजसु || 22||
उपानुमा च भता भोा महेर: |
परमाेित चाुो देहेऽुष: पर: || 23||
य एवं वेि पुषं कृ ितं च गुणै: सह |
सवथा वतमानोऽिप न स भूयोऽिभजायते || 24||
ानेनािन प के िचदाानमाना |
अे साङ् ेन योगेन कमयोगेन चापरे || 25||
अे ेवमजान: ुाे उपासते |
तेऽिप चािततरेव मृुं ुितपरायणा: || 26||
यावायते िकिं थावरजमम् |
ेेसंयोगाि भरतषभ || 27||
समं सवषु भूतेषु ितं परमेरम् |
िवनिवनं य: पित स पित || 28||
समं प सव समवथतमीरम् |
न िहनानाानं ततो याित परां गितम् || 29||
कृ ैव च कमािण ियमाणािन सवश: |
य: पित तथाानमकतारं स पित || 30||
यदा भ
ू
तप
ृ
थभावमेकथमन
ु
पयत |
तत एव च वतारं  सपते तदा || 31||
अनािदािगुणारमाायमय: |
शरीरथोऽिप कौेय न करोित न िलते || 32||
यथा सवगतं सौादाकाशं नोपिलते |
सवावथतो देहे तथाा नोपिलते || 33||
यथा काशयेक: कृ ं लोकिममं रिव: |
ें ेी तथा कृ ं काशयित भारत || 34||
ेेयोरेवमतरं ानचुषा |
भ
ू
तक
ृ
तमों च ये वद
ु
याित ते परम
्
|| 35||
Chapter 12
अजुन उवाच |
एवं सततयुा ये भाां पयुपासते |
ये चारमं तेषां के योगिवमा: || 1||
ीभगवानुवाच |
मावे मनो ये मां िनयुा उपासते |
या परयोपेताे मे युतमा मता: || 2||
ये रमिनदमं पयुपासते |
सवगमिच कू टथमचलुवम् || 3||
सियेयामं सव समबुय: |
ते ा
ु
व
 मामेव सवभूतिहते रता: || 4||
ेशोऽिधकतरेषामासचेतसाम् ||
अा िह गितद
ु
:खं देहवरवाते || 5||
ये तु सवािण कमािण मिय सं मर: |
अनेनैव योगेन मां ाय उपासते || 6||
तेषामहं समुता मृुसंसारसागरात् |
भवािम निचरााथ मावेिशतचेतसाम् || 7||
मेव मन आध मिय बुं िनवेशय |
िनविसिस मेव अत ऊ न संशय: || 8||
अथ िचं समाधातुं न शोिष मिय थरम् |
अासयोगेन ततो मािमाुं धनय || 9||
अासेऽसमथऽिस ममपरमो भव |
मदथमिप कमािण कु वमवािस || 10||
अथैतदशोऽिस कतु मोगमाित: |
सवकमफलागं तत: कु यतावान् || 11||
ेयो िह ानमासाानाानं िविशते |
ानामफलागागाारनरम् || 12||
अेा सवभूतानां मै: कण एव च |
िनममो िनरहार: समद
ु
:खसुख: मी || 13||
सु: सततं योगी यताा ढिनय: |
मिपतमनोबुय म: स मे िय: || 14||
याोिजते लोको लोकाोिजते च य: |
हषामषभयोेगैमुो य: स च मे िय: || 15||
अनपे: शुिचद उदासीनो गतथ: |
सवारपरागी यो म: स मे िय: || 16||
यो न ित न ेि न शोचित न काङ् ित |
शुभाशुभपरागी भमा: स मे िय: || 17||
सम: शौ च िमे च तथा मानापमानयो: |
शीतोसुखद
ु
:खेषु सम: सिवविजत: || 18||
तुिनाुितमनी सुो येन के निचत् |
अिनके त: थरमितभमाे ियो नर: || 19||
ये तु धामृतिमदं यथों पयुपासते |
धाना मरमा भाेऽतीव मे िया: || 20||
Chapter 14
ीभगवानुवाच |
परं भूय: वािम ानानां ानमुमम् |
याा मुनय: सव परां िसिमतो गता: || 1||
इदं ानमुपाि मम साधमागता: |
सगऽिप नोपजाये लये न थ च || 2||
मम योिनमहद
्
 तगभ दधाहम् |
सव: सवभूतानां ततो भवित भारत || 3||
सवयोिनषु कौेय मूतय: सव या: |
तासां  महोिनरहं बीजद: िपता || 4||
सं रजम इित गुणा: कृ ितसवा: |
िनब महाबाहो देहे देिहनमयम् || 5||
त सं िनमलाकाशकमनामयम् |
सुखसे न बाित ानसे न चानघ || 6||
रजो रागाकं िव तृाससमुवम् |
तिबाित कौेय कमसे न देिहनम् || 7||
तमानजं िव मोहनं सवदेिहनाम् |
मादालिनािभिबाित भारत || 8||
सवं स
ु
खे सजयत रज: कमण भारत |
ानमाव
ृ
य त
ु
तम: मादे सजयय
ु
त || 9||
रजमािभभूय सं भवित भारत |
रज: सं तमैव तम: सं रजथा || 10||
सवारेष
ु
देहेऽिमकाश उपजायते |
ानं यदा तदा वाव
ृ
ं सवमय
ु
त || 11||
लोभ: व
ृ
रारभ: कमणामशम: प
ृ
हा |
रजयेतान जायते वव
ृ
े भरतषभ || 12||
अकाशोऽव
ृ
 मादो मोह एव च |
तमयेतान जायते वव
ृ
े क
ु
नदन || 13||
यदा से वृे तु लयं याित देहभृत् |
तदोमिवदां लोकानमलाितपते || 14||
रजिस लयं गा कमसिषु जायते |
तथा लीनमिस मूढयोिनषु जायते || 15||
कमण: सुकृ ता: साकं िनमलं फलम् |
रजसु फलं द
ु
:खमानं तमस: फलम् || 16||
सवासजायते ानं रजसो लोभ एव च |
मादमोहौ तमसो भवतोऽानमेव च || 17||
ऊ ग सथा मे ित राजसा: |
जघगुणवृिथा अधो ग तामसा: || 18||
नां गुणे: कतारं यदा ानुपित |
गुणे परं वेि मावं सोऽिधगित || 19||
गुणानेतानती ीेही देहसमुवान् |
जमृुजराद
ु
:खैिवमुोऽमृतमुते || 20||
अजुन उवाच |
कै िलै ीगुणानेतानतीतो भवित भो |
िकमाचार: कथं चैतांीगुणानितवतते || 21||
ीभगवानुवाच |
काशं च वृिं च मोहमेव च पाव |
न ेि सवृािन न िनवृािन काङ् ित || 22||
उदासीनवदासीनो गुणैय न िवचाते |
गुणा वत इेवं योऽवितित नेते || 23||
समद
ु
:खसुख: थ: समलोाकान: |
तुियाियो धीरुिनासंुित: || 24||
मानापमानयोुुो िमारपयो: |
सवारपरागी गुणातीत: स उते || 25||
मां च योऽिभचारेण भयोगेन सेवते |
स गुणामतीैताभूयाय कते || 26||
णो िह िताहममृताय च |
शात च धम सुखैकाक च || 27||
Chapter 15
ीभगवानुवाच |
ऊमूलमध:शाखमं ारयम् |
छांिस य पणािन यं वेद स वेदिवत् || 1||
अधो सृता शाखा
गुणवृा िवषयवाला: |
अध मूलानुसतािन
कमानुबीिन मनुलोके || 2||
न पमेह तथोपलते
नाो न चािदन च सिता |
अमेनं सुिवढमूल
मसशेण ढेन िछा || 3||
तत: पदं तरमािगतं
यगता न िनवत भूय: |
तमेव चां पुषं पे
यत: वृि: सृता पुराणी || 4||
िनमानमोहा िजतसदोषा
अािना िविनवृकामा: |
ैिवमुा: सुखद
ु
:खसंै
गमूढा: पदमयं तत् || 5||
न तासयते सूय न शशाो न पावक: |
या न िनवते ताम परमं मम || 6||
ममैवांशो जीवलोके जीवभूत: सनातन: |
मन:षानीयािण कृ ितथािन कषित || 7||
शरीरं यदवाोित याुामतीर: |
गृहीैतािन संयाित वायुगािनवाशयात् || 8||
ों च
ु
: शनं च रसनं ाणमेव च |
अिधाय मनायं िवषयानुपसेवते || 9|
उामं थतं वािप भुानं वा गुणातम् |
िवमूढा नानुप प ानच
ु
ष
: || 10||
यतो योिगनैनं पावथतम् |
यतोऽकृ ताानो नैनं पचेतस: || 11||
यदािदगतं तेजो जगासयतेऽखलम् |
यमिस याौ तेजो िव मामकम् || 12||
गामािव च भूतािन धारयाहमोजसा |
पुािम चौषधी: सवा: सोमो भूा रसाक: || 13||
अहं वैानरो भूा ािणनां देहमाित: |
ाणापानसमायु: पचां चतुिवधम् || 14||
सव चाहं िद सििवो
म: ृितानमपोहनं च |
वेदै सवरहमेव वेो
वेदाकृ ेदिवदेव चाहम् || 15||
ािवमौ पुषौ लोके रार एव च |
र: सवािण भूतािन कू टथोऽर उते || 16||
उम: पुष: परमाेुदात: |
यो लोकयमािव िबभय ईर: || 17||
यारमतीतोऽहमरादिप चोम: |
अतोऽ लोके वेदे च िथत: पुषोम: || 18||
यो मामेवमसम
ू
ढो जानात प
ु
षोमम
्
|
स सववजत मां सवभावेन भारत || 19||
इित गुतमं शािमदमुं मयानघ |
एतद
्
बुद
्
ा बुमााृ तकृ  भारत || 20||
Chapter 16
ीभगवानुवाच |
अभयं ससंशुानयोगवथित: |
दानं दम य ाायप आजवम् || 1||
अिहंसा समोधाग: शारपैशुनम् |
दया भूतेलोलुं मादवं ीरचापलम् || 2||
तेज: मा धृित: शौचमोहोनाितमािनता |
भव सदं दैवीमिभजात भारत || 3||
दो दपऽिभमान ोध: पामेव च |
अानं चािभजात पाथ सदमासुरीम् || 4||
दैवी सिमोाय िनबायासुरी मता |
मा शुच: सदं दैवीमिभजातोऽिस पाव || 5||
ौ भूतसग लोके ऽैव आसुर एव च |
दैवो िवरश: ो आसुरं पाथ मे णु || 6||
वृिं च िनवृिं च जना न िवद
ु
रासुरा: |
न शौचं नािप चाचारो न सं तेषु िवते || 7||
असमितं ते जगदारनीरम् |
अपररसूतं िकमामहैतुकम् || 8||
एतां िमव नाानोऽबुय: |
भवुकमाण: याय जगतोऽिहता: || 9||
काममाि द
ु
ूरं दमानमदाता: |
मोहाद
्
गृहीासाहावतेऽशुिचता: || 10||
िचामपरमेयां च लयाामुपािता: |
कामोपभोगपरमा एताविदित िनिता: || 11||
आशापाशशतैबा: कामोधपरायणा: |
ईहे कामभोगाथमायेनाथसयान् || 12||
इदम मया लिममं ाे मनोरथम् |
इदमीदमिप मे भिवित पुनधनम् || 13||
असौ मया हत: शुहिने चापरानिप |
ईरोऽहमहं भोगी िसोऽहं बलवाुखी || 14||
आोऽिभजनवान कोऽोऽ सशो मया |
ये दाािम मोिद इानिवमोिहता: || 15||
अनेकिचिवाा मोहजालसमावृता: |
सा: कामभोगेषु पत नरके ऽशुचौ || 16||
आसािवता: ा धनमानमदाता: |
यजे नामयैे देनािविधपूवकम् || 17||
अहकारं बलं दप कामं ोधं च संता: |
मामामपरदेहेष
ु
षतोऽयस
ू
यका: || 18||
तानहं िषत: ू रांसारेषु नराधमान् |
िपाजमशुभानासुरीेव योिनषु || 19||
आसुरीं योिनमापा मूढा जिन जिन |
मामाैव कौेय ततो याधमां गितम् || 20||
ििवधं नरकेदं ारं नाशनमान: |
काम: ोधथा लोभादेतयं जेत् || 21||
एतैिवमु: कौेय तमोारैिभनर: |
आचरान: ेयतो याित परां गितम् || 22||
य: शािविधमुृ वतते कामकारत: |
न स िसमवाोित न सुखं न परां गितम् || 23||
ताां माणं ते कायाकायवथतौ |
ाा शािवधानों कम कतुिमहाहिस || 24||
Chapter 17
अजुन उवाच |
ये शािविधमुृ यजे याता: |
तेषां िना तु का कृ समाहो रजम: || 1||
ीभगवानुवाच |
ििवधा भवित ा देिहनां सा भावजा |
साकी राजसी चैव तामसी चेित तां णु || 2||
सानुपा सव ा भवित भारत |
ामयोऽयं पुषो यो य : स एव स: || 3||
यजे साका देवारांिस राजसा: |
ेताभूतगणांाे यजे तामसा जना: || 4||
अशािविहतं घोरं ते ये तपो जना: |
दाहारसंयुा: कामरागबलाता: || 5||
कषय: शरीरथं भूताममचेतस: |
मां चैवा:शरीरथं ताासुरिनयान् || 6||
आहारिप सव ििवधो भवित िय: |
यपथा दानं तेषां भेदिममं णु || 7|
आयु:सबलारोसुखीितिववधना: |
रा: िा: थरा ा आहारा: साकिया: || 8||
कलवणाुतीणिवदािहन: |
आहारा राजसेा द
ु
:खशोकामयदा: || 9||
यातयामं गतरसं प
ू
त पय
ु
षतं च यत
्
|
उिछमप चामेयं भोजनं तामसयम
्
|| 10||
अफलाकाििभयो िविधो य इते |
यमेवेित मन: समाधाय स साक: || 11||
अिभसाय तु फलं दाथमिप चैव यत् |
इते भरते तं यं िव राजसम् || 12||
िविधहीनमसृां महीनमदिणम् |
ािवरिहतं यं तामसं परचते || 13||
देविजगुापूजनं शौचमाजवम् |
चयमिहंसा च शारीरं तप उते || 14||
अनुेगकरं वां सं ियिहतं च यत् |
ाायासनं चैव वायं तप उते || 15||
मन: साद: सौं मौनमािविनह: |
भावसंशुरेतपो मानसमुते || 16||
या परया तं तपिवधं नरै: |
अफलाकाििभयुै: साकं परचते || 17||
सारमानपूजाथ तपो देन चैव यत् |
ियते तिदह ों राजसं चलमुवम् || 18||
म
ू
ढाहेणामनो यपीडया यते तप: |
परयोसादनाथ वा तामसम
ु
दातम
्
|| 19||
दातिमित यानं दीयतेऽनुपकारणे |
देशे काले च पाे च तानं साकं ृतम् || 20||
यु ुपकाराथ फलमुि वा पुन: |
दीयते च परं तानं राजसं ृतम् || 21||
अदेशकाले यानमपाे दीयते |
असृ तमवातं तामसमुदातम् || 22||
ॐ तिदित िनदशो णिवध: ृत: |
ाणाेन वेदा या िविहता: पुरा || 23||
ताद
्
ॐ इुदा यदानतप:िया: |
वते िवधानोा: सततं वािदनाम् || 24||
तिदनिभसाय फलं यतप:िया: |
दानिया िविवधा: िये मोकाििभ: || 25||
सावे साधुभावे च सिदेतयुते |
शे कमिण तथा स: पाथ युते || 26||
ये तपिस दाने च थित: सिदित चोते |
कम चैव तदथयं सिदेवािभधीयते || 27||
अया तं दं तपं कृ तं च यत् |
असिदुते पाथ न च ते नो इह || 28||
Chapter 18
अजुन उवाच |
सास महाबाहो तिमािम वेिदतुम् |
ाग च षीके श पृथे िशिनषूदन || 1||
ीभगवानुवाच |
काानां कमणां ासं सासं कवयो िवद
ु
: |
सवकमफलागं ाागं िवचणा: || 2||
ां दोषविदेके कम ामनीिषण: |
यदानतप:कम न ािमित चापरे || 3||
िनयं णु मे त ागे भरतसम |
ागो िह पुषा ििवध: सकीितत: || 4||
यदानतप:कम न ां कायमेव तत् |
यो दानं तपैव पावनािन मनीिषणाम् || 5||
एतािप तु कमािण सं ा फलािन च |
कतानीित मे पाथ िनितं मतमुमम् || 6||
िनयत तु सास: कमणो नोपपते |
मोहा परागामस: परकीितत: || 7||
द
ु
:खिमेव यम कायेशभयाजेत् |
स कृ ा राजसं ागं नैव ागफलं लभेत् || 8||
कायिमेव यम िनयतं ियतेऽजुन |
सं ा फलं चैव स ाग: साको मत: || 9||
न ेकु शलं कम कु शले नानुषते |
ागी ससमािवो मेधावी िछसंशय: || 10||
न िह देहभृता शं ुं कमाशेषत: |
यु कमफलागी स ागीिभधीयते || 11||
अिनिमं िमं च ििवधं कमण: फलम् |
भवािगनां े न तु सािसनां िचत् || 12||
पैतािन महाबाहो कारणािन िनबोध मे |
साङ् े कृ ताे ोािन िसये सवकमणाम् || 13||
अिधानं तथा कता करणं च पृथधम् |
िविवधा पृथेा दैवं चैवा पमम् || 14||
शरीरवानोिभयम ारभते नर: |
ां वा िवपरीतं वा पैते त हेतव: || 15||
तैवं सित कतारमाानं के वलं तु य: |
पकृ तबुा स पित द
ु
मित: || 16||
य नाहङ् कृ तो भावो बुय न िलते |
हाऽिप स इमाँोका ह न िनबते || 17||
ानं ेयं पराता ििवधा कमचोदना |
करणं कम कतित ििवध: कमसंह: || 18||
ानं कम च कता च िधैव गुणभेदत: |
ोते गुणसङ् ाने यथावृणु तािप || 19||
सवभूतेषु येनैकं भावमयमीते |
अिवभं िवभेषु तानं िव साकम् || 20||
पृथेन तु यानं नानाभावाृथधान् |
वेि सवषु भूतेषु तानं िव राजसम् || 21
यु कृ वदेकाय समहैतुकम् |
अताथवदं च तामसमुदातम् || 22||
िनयतं सरिहतमरागेषत: कृ तम् |
अफलेुना कम यताकमुते || 23||
युकामेुना कम साहारेण वा पुन: |
ियते बलायासं ताजसमुदातम् || 24||
अनुबं यं िहंसामनपे च पौषम् |
मोहादारते कम यतामसमुते || 25||
मुसोऽनहंवादी धृुाहसमत: |
िसिसोिनिवकार: कता साक उते || 26||
रागी कमफलेुलुो िहंसाकोऽशुिच: |
हषशोकात: कता राजस: परकीितत: || 27||
अयु: ाकृ त: : शठो नैृ ितकोऽलस: |
िवषादी दीघसूी च कता तामस उते || 28||
बुेभदं धृतेैव गुणतिवधं णु |
ोमानमशेषेण पृथेन धनय || 29||
वृिंच िनवृिं च कायाकाय भयाभये |
बं मों च या वेिबु: सा पाथ साकी || 30||
यया धममधम च काय चाकायमेव च |
अयथावजानाित बु: सा पाथ राजसी || 31||
अधम धमिमित या मते तमसावृता |
सवाथापरीतां बु: सा पाथ तामसी || 32||
धृा यया धारयते मन:ाणेयिया: |
योगेनािभचारा धृित: सा पाथ साकी || 33||
यया तु धमकामाथाृा धारयतेऽजुन |
से न फलाकाङ् ी धृित: सा पाथ राजसी || 34||
यया ं भयं शोकं िवषादं मदमेव च |
न िवमुित द
ु
मधा धृित: सा पाथ तामसी || 35||
सुखं दानीं ििवधं णु मे भरतषभ |
अासामते य द
ु
:खां च िनगित || 36||
यदे िवषिमव परणामेऽमृतोपमम् |
तुखं साकं ोमाबुसादजम् || 37||
िवषयेयसंयोगादेऽमृतोपमम् |
परणामे िवषिमव तुखं राजसं ृतम् || 38||
यदे चानुबे च सुखं मोहनमान: |
िनालमादों तामसमुदातम् || 39||
न तद पृिथां वा िदिव देवेषु वा पुन: |
सं कृ ितजैमुं यदेिभ: ािभगुणै: || 40||
ाणियिवशां शूाणां च परप |
कमािण िवभािन भावभवैगुणै: || 41||
शमो दमप: शौचं ाराजवमेव च |
ानं िवानमां कम भावजम् || 42||
शौय तेजो धृितदां युे चापलायनम् |
दानमीरभाव ां कम भावजम् || 43||
कृ िषगौरवािणं वैकम भावजम् |
परचयाकं कम शूािप भावजम् || 44||
े े कमिभरत: संिसं लभते नर: |
कमिनरत: िसं यथा िवित तृणु || 45||
यत: वृिभूतानां येन सविमदं ततम् |
कमणा तम िसं िवित मानव: || 46||
ेयाधम िवगुण: परधमानुितात् |
भाविनयतं कम कु वाोित िकषम् || 47||
सहजं कम कौेय सदोषमिप न जेत् |
सवारा िह दोषेण धूमेनािरवावृता: || 48||
असबु: सव िजताा िवगतृह: |
नैिसं परमां सासेनािधगित || 49||
िसं ाो यथा  तथाोित िनबोध मे |
समासेनैव कौेय िना ान या परा || 50||
बुा िवशुया युो धृाानं िनय च |
शादीषयांा रागेषौ ुद च || 51||
िविवसेवी लवाशी यतवाायमानस: |
ानयोगपरो िनं वैरां समुपाित: || 52||
अहारं बलं दप कामं ोधं परहम् |
िवमु िनमम: शाो भूयाय कते || 53||
भूत: साा न शोचित न काङ् ित |
सम: सवषु भूतेषु मं लभते पराम् || 54||
भा मामिभजानाित यावाा तत: |
ततो मां ततो ाा िवशते तदनरम् || 55||
सवकमािप सदा कु वाणो मपाय: |
मसादादवाोित शातं पदमयम् || 56||
चेतसा सवकमािण मिय स मर: |
बुयोगमुपाि म: सततं भव || 57||
म: सवद
ु
गािण मसादारिस |
अथ चेमहारा ोिस िवनङ् िस || 58||
यदहारमाि न यो इित मसे |
िमैष वसाये कृ ितां िनयोित || 59|
भावजेन कौेय िनब: ेन कमणा |
कतु नेिस योहारवशोऽिप तत् || 60||
ईर: सवभूतानां ेशेऽजुन ितित |
ामयवभूतािन याढािन मायया || 61||
तमेव शरणं ग सवभावेन भारत |
तसादारां शां थानं ािस शातम् || 62||
इित ते ानमाातं गुाद
्
गुतरं मया |
िवमृैतदशेषेण यथेिस तथा कु || 63||
सवगुतमं भूय: णु मे परमं वच: |
इोऽिस मे ढिमित ततो वािम ते िहतम् || 64||
मना भव मो माजी मां नमु |
मामेवैिस सं ते ितजाने ियोऽिस मे || 65||
सवधमार मामेकं शरणं ज |
अहं ां सवपापेो मोियािम मा शुच: || 66||
इदं ते नातपाय नाभाय कदाचन |
न चाशुूषवे वां न च मां योऽसूयित || 67||
य इदं परमं गुं मेिभधाित |
भं मिय परां कृ ा मामेवैसंशय: || 68||
न च तानुेषु किे ियकृ म: |
भिवता न च मे ताद: ियतरो भुिव || 69|
अेते च य इमं ध संवादमावयो: |
ानयेन तेनाहिम: ािमित मे मित: || 70||
ावाननसूय णुयादिप यो नर: |
सोऽिप मु: शुभाँोकाा
ु
या
ुकमणाम् || 71||
कदेत
तं पाथ यैकाेण चेतसा |
कदानसोह: ने धनय || 72||
अजुन उवाच |
नो मोह: ृितला सादायाुत |
थतोऽ गतसेह: करे वचनं तव || 73||
सय उवाच |
इहं वासुदेव पाथ च महान: |
संवादिमममौषमद
्
भुतं रोमहषणम् || 74||
ाससादा
तवानेतद
्
गुमहं परम् |
योगं योगेराृ ाााथयत: यम् || 75||
राजंृ संृ संवादिमममद
्
भुतम् |
के शवाजुनयो: पुं ािम च मुमु: || 76||
त संृ संृ पमद
्
भुतं हरे: |
िवयो मे महानराजािम च पुन: पुन: || 77||
य योगेर: कृ ो य पाथ धनुधर: |
त ीिवजयो भूितुवा नीितमितमम || 78||
Chapter 10
ीभगवानुवाच |
भूय एव महाबाहो णु मे परमं वच: |
येऽहं ीयमाणाय वािम िहतकाया || 1||
न मे िवद
ु
: सुरगणा: भवं न महषय: |
अहमािदिह देवानां महषणां च सवश: || 2||
यो मामजमनािदं च वेि लोकमहेरम् |
असूढ: स मषु सवपापै: मुते || 3||
बुानमसोह: मा सं दम: शम: |
सुखं द
ु
:खं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च || 4||
अिहंसा समता तुिपो दानं यशोऽयश: |
भव भावा भूतानां म एव पृथधा: || 5||
महषय: स पूव चारो मनवथा |
मावा मानसा जाता येषां लोक इमा: जा: || 6||
महषय: स पूव चारो मनवथा |
मावा मानसा जाता येषां लोक इमा: जा: || 6||
अहं सव भवो म: सव वतते |
इित मा भजे मां बुधा भावसमता: || 8||
मा मताणा बोधय: पररम् |
कथय मां िनं तु च रम च || 9||
तेषां सततयुानां भजतां ीितपूवकम् |
ददािम बुयोगं तं येन मामुपया ते || 10||
तेषामेवानुकाथमहमानजं तम: |
नाशयााभावथो ानदीपेन भाता || 11||
अजुन उवाच |
परं  परं धाम पिवं परमं भवान् |
पुषं शातं िदमािददेवमजं िवभुम् || 12||
आामृषय: सव देविषनारदथा |
अिसतो देवलो ास: यं चैव वीिष मे || 13||
सवमेततं मे यां वदिस के शव |
न िह ते भगवं िवद
ु
दवा न दानवा: || 14||
यमेवानाानं वे ं पुषोम |
भूतभावन भूतेश देवदेव जगते || 15||
वुमहशेषेण िदा ािवभूतय: |
यािभिवभूितिभलकािनमांं ा ितिस || 16||
कथं िवामहं योिगंां सदा परिचयन् |
के षु के षु च भावेषु िचोऽिस भगवया || 17||
िवरेणानो योगं िवभूितं च जनादन |
भूय: कथय तृिह तो ना मेऽमृतम् || 18||
ीभगवानुवाच |
ह ते कथियािम िदा ािवभूतय: |
ाधात: कु े नाो िवर मे ||19||
अहमाा गुडाके श सवभूताशयथत: |
अहमािद मं च भूतानाम एव च || 20||
आिदानामहं िवुितषां रिवरंशुमान् |
मरीिचमताम नाणामहं शशी || 21||
वेदानां सामवेदोऽ देवानाम वासव: |
इयाणां मना भूतानाम चेतना || 22||
ाणां शरा िवेशो यरसाम् |
वसूनां पावका मे: िशखरणामहम् || 23||
पुरोधसां च मुं मां िव पाथ बृहितम् |
सेनानीनामहं : सरसाम सागर: || 24||
महषणां भृगुरहं िगरामेकमरम् |
यानां जपयोऽ थावराणां िहमालय: || 25||
अ: सववृाणां देवषणां च नारद: |
गवाणां िचरथ: िसानां किपलो मुिन: || 26||
उै:वसमानां िव माममृतोवम् |
ऐरावतं गजेाणां नराणां च नरािधपम् || 27||
आयुधानामहं वं धेनूनाम कामधुक् |
जना कप: सपाणाम वासुिक: || 28||
अना नागानां वणो यादसामहम् |
िपतृणामयमा चा यम: संयमतामहम् || 29||
ादा दैानां काल: कलयतामहम् |
मृगाणां च मृगेोऽहं वैनतेय पिणाम् || 30||
पवन: पवताम राम: शभृतामहम् |
झषाणां मकरा ोतसाम जावी || 31||
सगाणामािदर मं चैवाहमजुन |
अािवा िवानां वाद: वदतामहम् || 32||
अराणामकारोऽ : सामािसक च |
अहमेवाय: कालो धाताहं िवतोमुख: || 33||
मृु: सवहराहमुव भिवताम् |
कीित: ीवा नारीणां ृितमधा धृित: मा || 34||
बृहाम तथा साां गायी छसामहम् |
मासानां मागशीषऽहमृतूनां कु सुमाकर: || 35||
द
्
यूतं छलयताम तेजेजनामहम् |
जयोऽ वसायोऽ सं सवतामहम् || 36||
वृीनां वासुदेवोऽ पावानां धनय: |
मुनीनामहं ास: कवीनामुशना किव: || 37||
दो दमयताम नीितर िजगीषताम् |
मौनं चैवा गुानां ानं ानवतामहम् || 38||
यािप सवभूतानां बीजं तदहमजुन |
न तद िवना याया भूतं चराचरम् || 39||
नाोऽ मम िदानां िवभूतीनां परप |
एष तूेशत: ोो िवभूतेिवरो मया || 40||
यिभूितमं ीमद
ू
िजतमेव वा |
तदेवावग ं मम तेजोंऽशसवम् || 41||
अथवा बनैतेन िकं ातेन तवाजुन |
िवाहिमदं कृ मेकांशेन थतो जगत् || 42||
Chapter 9
ीभगवानुवाच |
इदं तु ते गुतमं वानसूयवे |
ानं िवानसिहतं याा मोसेऽशुभात् || 1||
राजिवा राजगुं पिविमदमुमम् |
ावगमं ध सुसुखं कतुमयम् || 2||
अधाना: पुषा धमा परप |
अा मां िनवते मृुसंसारविन || 3||
मया ततिमदं सव जगदमूितना |
मथािन सवभूतािन न चाहं तेवथत: || 4||
न च मथािन भूतािन प मे योगमैरम् |
भूतभृ च भूतथो ममाा भूतभावन: || 5||
यथाकाशथतो िनं वायु: सवगो महान् |
तथा सवािण भूतािन मथानीुपधारय || 6||
सवभूतािन कौेय कृ ितं या मािमकाम् |
कये पुनािन कादौ िवसृजाहम् || 7||
कृ ितं ामव िवसृजािम पुन: पुन: |
भूतामिममं कृ मवशं कृ तेवशात् || 8||
न च मां तािन कमािण िनब धनय |
उदासीनवदासीनमसं तेषु कमसु || 9||
मयाेण कृ ित: सूयते सचराचरम् |
हेतुनानेन कौेय जगिपरवतते || 10||
अवजान मां मूढा मानुषीं तनुमाितम् |
परं भावमजानो मम भूतमहेरम् || 11||
मोघाशा मोघकमाणो मोघाना िवचेतस: |
रासीमासुरीं चैव कृ ितं मोिहनीं िता: || 12||
महाानु मां पाथ दैवीं कृ ितमािता: |
भजनमनसो ाा भूतािदमयम् || 13||
सततं कीतयो मां यत ढता: |
नम मां भा िनयुा उपासते || 14||
ानयेन चाे यजो मामुपासते |
एकेन पृथेन बधा िवतोमुखम् || 15||
अहं तुरहं य: धाहमहमौषधम् |
मोऽहमहमेवामहमिरहं तम् || 16||
िपताहम जगतो माता धाता िपतामह: |
वें पिवमोार ऋाम यजुरेव च || 17||
गितभता भु: साी िनवास: शरणं सुत् |
भव: लय: थानं िनधानं बीजमयम् || 18||
तपाहमहं वष िनगृुृजािम च |
अमृतं चैव मृु सदसाहमजुन || 19||
ैिवा मां सोमपा: पूतपापा
यैरा गितं ाथये |
ते पुमासा सुरेलोक
म िदािव देवभोगान् || 20||
ते तं भुा गलोकं िवशालं
ीणे पुे मलोकं िवश |
एवं यीधममनुपा
गतागतं कामकामा लभे || 21||
अनाियो मां ये जना: पयुपासते |
तेषां िनािभयुानां योगेमं वहाहम् || 22||
येऽदेवता भा यजे याता: |
तेऽिप मामेव कौेय यजिविधपूवकम् || 23||
अहं िह सवयानां भोा च भुरेव च |
न तु मामिभजान तेनातव ते || 24||
या देवता देवात
ॄ
ा िपतृता: |
भूतािन या भूतेा या मािजनोऽिप माम् ||25||
पं पुं फलं तोयं यो मे भा यित |
तदहं भुपतमािम यतान: || 26||
यरोिष यदािस युहोिष ददािस यत् |
यपिस कौेय तु  मदपणम् || 27||
शुभाशुभफलैरेवं मोसे कमबनै: |
संासयोगयुाा िवमुो मामुपैिस || 28||
समोऽहं सवभूतेषु न मे ेोऽ न िय: |
ये भज तु मां भा मिय ते तेषु चाहम् || 29||
अिप चेुद
ु
राचारो भजते मामनभाक् |
साधुरेव स म: सविसतो िह स: || 30||
िं भवित धमाा शां िनगित |
कौेय ितजानीिह न मे भ: णित || 31||
मां िह पाथ पाि येऽिप ु: पापयोनय: |
यो वैाथा शूाेऽिप या परां गितम् || 32||
िकं पुनाणा: पुा भा राजषयथा |
अिनमसुखं लोकिममं ा भज माम् || 33||
मना भव मो माजी मां नमु |
मामेवैिस युैवमाानं मरायण: || 34||
Chapter 8
अजुन उवाच |
िकं त िकमां िकं कम पुषोम |
अिधभूतं च िकं ोमिधदैवं िकमुते || 1||
अिधय: कथं कोऽ देहेऽधुसूदन |
याणकाले च कथं ेयोऽिस िनयतािभ: || 2||
ीभगवान
ु
वाच |
अरं  परमं वभावोऽयामम
ु
यते |
भ
ू
तभावोवकरो वसग: कमसित: || 3||
अिधभूतं रो भाव: पुषािधदैवतम् |
अिधयोऽहमेवा देहे देहभृतां वर || 4||
अकाले च मामेव रुा कलेवरम् |
य: याित स मावं याित ना संशय: || 5||
यं यं वािप रभावं जे कलेवरम् |
तं तमेवैित कौेय सदा तावभािवत: || 6||
तावषु कालेषु मामनुर यु च |
मिपतमनोबुमामेवैसंशयम् || 7||
अासयोगयुेन चेतसा नागािमना |
परमं पुषं िदं याित पाथानुिचयन् || 8||
किवं पुराणमनुशािसतार
मणोरणीयांसमनुरे: |
सव धातारमिचप
मािदवण तमस: परात् || 9||
याणकाले मनसाचलेन
भा युो योगबलेन चैव |
ुवोमे ाणमावे सक्
स तं परं पुषमुपैित िदम् || 10||
यदरं वेदिवदो वद
िवश यतयो वीतरागा: |
यिदो चय चर
ते पदं संहेण वे || 11||
सवारािण संय मनो िद िन च |
मूाधायान: ाणमाथतो योगधारणाम् || 12||
ओिमेकारं  ाहरामनुरन् |
य: याित जेहं स याित परमां गितम् || 13||
अनचेता: सततं यो मां रित िनश: |
ताहं सुलभ: पाथ िनयु योिगन: || 14||
मामुपे पुनज द
ु
:खालयमशातम् |
ना
ु
व
 महाान: संिसं परमां गता: || 15||
आभुवनाोका: पुनरावितनोऽजुन |
मामुपे तु कौेय पुनज न िवते || 16||
सहयुगपयमहयणो िवद
ु
: |
रािं युगसहाां तेऽहोरािवदो जना: || 17||
अाय: सवा: भवहरागमे |
राागमे लीये तैवासके || 18||
भूताम: स एवायं भूा भूा लीयते |
राागमेऽवश: पाथ भवहरागमे || 19||
पराु भावोऽोऽोऽानातन: |
य: स सवषु भूतेषु नु न िवनित || 20||
अोऽर इुमा: परमां गितम् |
यं ा न िनवते ताम परमं मम || 21|
पुष: स पर: पाथ भा लनया |
या:थािन भूतािन येन सविमदं ततम् || 22||
य काले नावृिमावृिं चैव योिगन: |
याता या तं कालं वािम भरतषभ || 23||
अिितरह: शु: षासा उरायणम् |
त याता ग  िवदो जना: || 24||
धूमो रािथा कृ : षासा दिणायनम् |
त चामसं ोितयगी ा िनवतते || 25||
शुकृ े गती ेते जगत: शाते मते |
एकया यानावृिमयावतते पुन: || 26||
नैते सृती पाथ जानोगी मुित कन |
तावषु कालेषु योगयुो भवाजुन || 27||
वेदेषु येषु तप:सु चैव
दानेषु युफलं िदम् |
अेित तविमदं िविदा
योगी परं थानमुपैित चाम् || 28||
Chapter 7
ीभगवानुवाच |
मासमना: पाथ योगं युदाय: |
असंशयं समं मां यथा ािस तृणु || 1||
ानं तेऽहं सिवानिमदं वाशेषत: |
याा नेह भूयोऽातमविशते || 2||
मनुाणां सहेषु कितित िसये |
यततामिप िसानां किां वेि तत: || 3||
भूिमरापोऽनलो वायु: खं मनो बुरेव च |
अहार इतीयं मे िभा कृ ितरधा || 4||
अपरेयिमतां कृ ितं िव मे पराम् |
जीवभूतां महाबाहो ययेदं धायते जगत् || 5||
एतोनीिन भूतािन सवाणीुपधारय |
अहं कृ  जगत: भव: लयथा || 6||
म: परतरं नािद धनय |
मिय सविमदं ोतं सूे मिणगणा इव || 7||
रसोऽहमु कौेय भा शिशसूययो: |
णव: सववेदेषु श: खे पौषं नृषु || 8||
पुो ग: पृिथां च तेजा िवभावसौ |
जीवनं सवभूतेषु तपा तपषु || 9||
बीजं मां सवभूतानां िव पाथ सनातनम् |
बुबुमताम तेजेजनामहम् || 10||
बलं बलवतां चाहं कामरागिवविजतम् |
धमािवो भूतेषु कामोऽ भरतषभ || 11|
ये चैव साका भावा राजसाामसा ये |
म एवेित ता न हं तेषु ते मिय || 12||
ििभगुणमयैभावैरेिभ: सविमदं जगत् |
मोिहतं नािभजानाित मामे: परमयम् || 13||
दैवी ेषा गुणमयी मम माया द
ु
रया |
मामेव ये पे मायामेतां तर ते || 14||
न मां द
ु
ृ ितनो मूढा: पे नराधमा: |
माययापताना आसुरं भावमािता: || 15||
चतुिवधा भजे मां जना: सुकृ ितनोऽजुन |
आत िजासुरथाथ ानी च भरतषभ || 16||
तेषां ानी िनयु एकभिविशते |
ियो िह ािननोऽथमहं स च मम िय: || 17||
उदारा: सव एवैते ानी ाैव मे मतम् |
आथत: स िह युाा मामेवानुमां गितम् || 18||
बनां जनामे ानवाां पते |
वासुदेव: सविमित स महाा सुद
ु
लभ: || 19||
कामैैैताना: पेऽदेवता: |
तं तं िनयममाथाय कृ ा िनयता: या || 20||
यो यो यां यां तनुं भ: यािचतुिमित |
त ताचलां ां तामेव िवदधाहम् || 21||
स तया या युाराधनमीहते |
लभते च तत: कामायैव िविहता तान् || 22||
अवु फलं तेषां तवमेधसाम् |
देवाेवयजो या मा या मामिप || 23||
अं मापं मे मामबुय: |
परं भावमजानो ममायमनुमम् || 24||
नाहं काश: सव योगमायासमावृत: |
मूढोऽयं नािभजानाित लोको मामजमयम् || 25||
वेदाहं समतीतािन वतमानािन चाजुन |
भिवािण च भूतािन मां तु वेद न कन || 26||
इाेषसमुेन मोहेन भारत |
सवभूतािन सोहं सग या परप || 27||
येषां गतं पापं जनानां पुकमणाम् |
ते मोहिनमुा भजे मां ढता: || 28||
जरामरणमोाय मामाि यत ये |
ते  तिद
ु
: कृ मां कम चाखलम् || 29||
सािधभूतािधदैवं मां सािधयं च ये िवद
ु
: |
याणकालेऽिप च मां ते िवद
ु
युचेतस: || 30||
Chapter 6
ीभगवानुवाच |
अनाित: कमफलं काय कम करोित य: |
स संासी च योगी च न िनरिन चािय: || 1||
यं संासिमित ायगं तं िव पाव |
न संसो योगी भवित कन || 2||
आोमुनेयगं कम कारणमुते |
योगाढ तैव शम: कारणमुते || 3||
यदा िह नेयाथषु न कमनुषते |
सवससंासी योगाढदोते || 4||
उरेदानाानं नाानमवसादयेत् |
आैव ानो बुराैव रपुरान: || 5||
बुराान येनाैवाना िजत: |
अनानु शुे वत ताैव शुवत् || 6||
िजतान: शा परमाा समािहत: |
शीतोसुखद
ु
:खेषु तथा मानापमानयो: || 7||
ानिवानतृाा कू टथो िविजतेय: |
यु इुते योगी समलोाकान: || 8||
सुायुदासीनमथेबुषु |
साधुिप च पापेषु समबुिविशते || 9||
योगी युीत सततमाानं रहिस थत: |
एकाकी यतिचाा िनराशीरपरह: || 10||
शुचौ देशे िता थरमासनमान: |
नाु तं नाितनीचं चैलािजनकु शोरम् || 11||
तैकां मन: कृ ा यतिचेयिय: |
उपिवासने युाोगमािवशुये || 12||
समं कायिशरोीवं धारयचलं थर: |
से नािसकां ं िदशानवलोकयन् || 13||
शााा िवगतभीचारते थत: |
मन: संय मो यु आसीत मर: || 14||
युेवं सदाानं योगी िनयतमानस: |
शां िनवाणपरमां मंथामिधगित || 15||
नातु योगोऽ न चैकामनत: |
न चाित शील जातो नैव चाजुन || 16||
युाहारिवहार युचे कमसु |
युावबोध योगो भवित द
ु
:खहा || 17||
यदा िविनयतं िचमाेवावितते |
िन:ृह: सवकामेो यु इुते तदा || 18||
यथा दीपो िनवातथो नेते सोपमा ृता |
योिगनो यतिच युतो योगमान: || 19||
योपरमते िचं िनं योगसेवया |
य चैवानाानं पािन तुित || 20||
सुखमाकं यद
्
बुामतीयम् |
वेि य न चैवायं थतलित तत: || 21||
यं ला चापरं लाभं मते नािधकं तत: |
यथतो न द
ु
:खेन गुणािप िवचाते || 22||
तं िवाद
्
द
ु
:खसंयोगिवयोगं योगसतम् |
स िनयेन योो योगोऽिनिवचेतसा || 23||
सभवाामांा सवानशेषत: |
मनसैवेयामं िविनय समत: || 24||
शनै: शनैपरमेद
्
बुा धृितगृहीतया |
आसंथं मन: कृ ा न िकिदिप िचयेत् || 25||
यतो यतो िनरित मनलमथरम् |
तततो िनयैतदाेव वशं नयेत् || 26||
शामनसं ेनं योिगनं सुखमुमम् |
उपैित शारजसं भूतमकषम् || 27||
युेवं सदाानं योगी िवगतकष: |
सुखेन संशमं सुखमुते || 28||
सवभूतथमाानं सवभूतािन चािन |
ईते योगयुाा सव समदशन: || 29||
यो मां पित सव सव च मिय पित |
ताहं न णािम स च मे न णित || 30||
सवभूतथतं यो मां भजेकमाथत: |
सवथा वतमानोऽिप स योगी मिय वतते || 31||
आौपेन सव समं पित योऽजुन |
सुखं वा यिद वा द
ु
:खं स योगी परमो मत: || 32||
अजुन उवाच |
योऽयं योगया ो: साेन मधुसूदन |
एताहं न पािम चलाथितं थराम् || 33||
चलं िह मन: कृ मािथ बलवद
्
ढम् |
ताहं िनहं मे वायोरव सुद
ु
रम् || 34||
ीभगवानुवाच |
असंशयं महाबाहो मनो द
ु
िनहं चलम् |
अासेन तु कौेय वैराेण च गृते || 35||
असंयताना योगो द
ु
ाप इित मे मित: |
वाना तु यतता शोऽवाुमुपायत: || 36||
अजुन उवाच |
अयित: योपेतो योगािलतमानस: |
अा योगसंिसं कां गितं कृ गित || 37||
कोभयिवािमव नित |
अितो महाबाहो िवमूढो ण: पिथ || 38||
एते संशयं कृ छेुमहशेषत: |
द: संशया छेा न ह
्
युपपते || 39||
ा पुकृ तां लोकानुिषा शाती: समा: |
शुचीनां ीमतां गेहे योगोऽिभजायते || 41||
अथवा योिगनामेव कु ले भवित धीमताम् |
एत द
ु
लभतरं लोके ज यदीशम् || 42||
त तं बुसंयोगं लभते पौवदेिहकम् |
यतते च ततो भूय: संिसौ कु नन || 43||
पूवाासेन तेनैव ियते वशोऽिप स: |
िजासुरिप योग शाितवतते || 44||
यातमानु योगी संशुिकष: |
अनेकजसंिसतो याित परां गितम् || 45||
तपोऽिधकोयोगी
ािनोऽिपमतोऽिधक:|
किमािधकोयोगी
ताोगीभवाजुन|| 46||
योिगनामिप सवषां मतेनाराना |
ावाभजते यो मां स मे युतमो मत: || 47||
Chapter 5
अजुन उवाच |
संासं कमणां कृ पुनयगं च शंसिस |
येय एतयोरेकं ते ूिह सुिनितम् || 1|
ीभगवान
ु
वाच |
संयास: कमयोग न:ेयसकराव
ु
भौ |
तयोत
ु
कमसंयासाकमयोगो वशयते || 2||
ेय: स िनसंासी यो न ेि न काङ् ित |
िनो िह महाबाहो सुखं बामुते || 3||
साङ् योगौ पृथाला: वद न पता: |
एकमाथत: सगुभयोिवते फलम् || 4||
याङ् ै: ाते थानं तोगैरिप गते |
एकं साङ् ं च योगं च य: पित स पित || 5||
संासु महाबाहो द
ु
:खमाुमयोगत: |
योगयुो मुिन निचरेणािधगित || 6||
योगयुो िवशुाा िविजताा िजतेय: |
सवभूताभूताा कु विप न िलते || 7||
नैव िकिरोमीित युो मेत तिवत् |
पृृशिगपसन् || 8||
लपसृजगृह
्

ु
षििमषिप |
इयाणीयाथषु वत इित धारयन् || 9||
ाधाय कमािण सं ा करोित य: |
िलते न स पापेन पपिमवासा || 10||
कायेन मनसा बुा के वलैरयैरिप |
योिगन: कम कु व सं ाशुये || 11||
यु: कमफलं ा शामाोित नैिकीम् |
अयु: कामकारेण फले सो िनबते || 12||
सवकमािण मनसा संाे सुखं वशी |
नवारे पुरे देही नैव कु व कारयन् || 13||
न कतृं न कमािण लोक सृजित भु: |
न कमफलसंयोगं भावु वतते || 14||
नादे किचापं न चैव सुकृ तं िवभु: |
अानेनावृतं ानं तेन मु जव: || 15||
ानेन तु तदानं येषां नािशतमान: |
तेषामािदवानं काशयित तरम् || 16||
तद
्
बुयदाानिारायणा: |
गपुनरावृिं ानिनधूतकषा: || 17|
िवािवनयसे ाणे गिव हिन |
शुिन चैव पाके च पता: समदिशन: || 18||
इहैव तैिजत: सग येषां साे थतं मन: |
िनदषं िह समं  ताद
्
िण ते थता: || 19||
न ेयं ा नोिजेा चाियम् |
थरबुरसूढो िवद
्
िण थत: || 20||
बाशसाा िवािन युखम् |
स योगयुाा सुखमयमुते || 21||
ये िह संशजा भोगा द
ु
:खयोनय एव ते |
आव: कौेय न तेषु रमते बुध: || 22||
शोतीहैव य: सोढुं ारीरिवमोणात् |
कामोधोवं वेगं स यु: स सुखी नर: || 23||
योऽ:सुखोऽरारामथा्योितरेव य: ।
स योगी िनवाणं भूतोऽिधगित ।। 24।।
लभे िनवाणमृषय: ीणकषा: |
िछैधा यताान: सवभूतिहते रता: || 25||
कामोधिवयुानां यतीनां यतचेतसाम् |
अिभतो िनवाणं वतते िविदतानाम् || 26||
शाृ ा बिहबाां
ु
ैवारे ुवो: |
ाणापानौ समौ कृ ा नासारचारणौ || 27||
यतेयमनोबुमुिनमपरायण: |
िवगतेाभयोधो य: सदा मु एव स: || 28||
भोारं यतपसां सवलोकमहेरम् |
सुदं सवभूतानां ाा मां शामृित || 29||